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Hum Jalawatan (en Hindi)
Agnishekhar (Autor)
·
Pralek Prakashan
· Tapa Blanda
Hum Jalawatan (en Hindi) - Agnishekhar
Libro Nuevo
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Reseña del libro "Hum Jalawatan (en Hindi)"
नब्बे के दशक की आधुनिक कश्मीरी कविता का एक युगांतरकारी आयाम उसकी निर्वासन-चेतना है । इतने दशकों बाद आज भी इधर के निर्वासित कालखंड में कश्मीरी कविता के केंद्र में जलावतनी उसका मुख्य समकालीन वस्तु-सत्य बना हुआ है।अपनी भूमि से बिछोह,जनसंहार की दारुण स्मृतियाँ,घृणा की राजनीति,कैंपों में पशुओं जैसी ज़िन्दगी,अस्तित्व और अस्मिता के प्रश्न,अनदेखी, एक जीती- जागती सनातन संस्कृति के विलोपन की आशंका जैसी विचलनकारी चिन्ता इन निर्वासित कश्मीरी कवियों का वर्ण्य-विषय है।आधुनिक कश्मीरी कविता के इस पहलु को समझने के लिए हमें यह पता होना चाहिए कि यह निर्वासन-चेतना आर्थिक बाध्यताओं,प्राकृतिक आपदाओं,विकास के कारण हुआ विस्थापन न होकर आस्था विशेष के नाम पर हुए जेनोसाइड (जनसंहार) के चलते घटित हुई है।हालाँकि संवेदना के स्तर पर सभी तरह के विस्थापनों की पीड़ा की भावभूमि एक सी होते हुए भी आधुनिक कश्मीरी कविता में केंद्रीय भाव-बोध के आयाम भिन्न हैं। इन कश्मीरी कविताओं के रचनाकार पाकिस्तान समर्थित जेहादी आतंकवाद,अलगाववाद के चलते बेदखल कर दिए गए कवि हैं। संसार को विदित है कि कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित अलगाववाद, जेहादी हिंसाचार,घृण
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El libro está escrito en Hindi.
La encuadernación de esta edición es Tapa Blanda.
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