60% OFF en Stock Limitado  Ver más

Enviar a
Quito, Pichincha
0
  • argentina
  • chile
  • colombia
  • españa
  • méxico
  • perú
  • estados unidos
  • internacional

Selecciona tu país

América

Europa

Resto del mundo

portada Yeh Gaaon Bikaau Hai (यह गाँव बिकाऊ है) (en Hindi)
Formato
Libro Físico
Año
2026
Idioma
Hindi
N° páginas
186
Encuadernación
Tapa Blanda
Dimensiones
21.6x14x1 cm
ISBN13
9789352965205

Yeh Gaaon Bikaau Hai (यह गाँव बिकाऊ है) (en Hindi)

M. M. Chandra (Autor) · Diamond Pocket Books Pvt Ltd · Tapa Blanda

Yeh Gaaon Bikaau Hai (यह गाँव बिकाऊ है) (en Hindi) - M. M. Chandra

Libro Nuevo Importado
Envío: 16 a 22 días háb.
$ 48.81$ 24.41
-50%
Costos de importación incluídos en el precio ✅
Libro Nuevo

Quedan 50 unidades

$ 24.41
Llega entre el 15 Sep y el 25 Sep a Quito, Pichincha. Seleccionar ubicación

Reseña del libro "Yeh Gaaon Bikaau Hai (यह गाँव बिकाऊ है) (en Hindi)"

एम.एम. चन्द्रा का यह तीसरा उपन्यास है। पिछले साल इनका लघु उपन्यास "प्रोस्तोर" प्रकाशित हुआ था जो 1990 के दशक के मजदूर आन्दोलन पर केंद्रित था। जिसका कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ।
लेखक के व्यंग्य, समीक्षा, आलोचना और समसामयिक रचनाओं का विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशन। हास्य-व्यंग्य पत्रिका 'अट्टहास' के तीन अंकों (आलोचना विशेषांक) और 'सुसंभाव्य' पत्रिका का सम्पादन किया है। लेखक की विभिन्न विषयों पर एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
यह उपन्यास इण्डिया के उस भारत के गाँव की कहानी है जो आधुनिक विकास की बलि चढ़ जाता है। उसके बाद यह सिलसिला चला और यह नारा 'यह गाँव बिकाऊ है' बार-बार, कभी किसी राज्य से तो कभी किसी राज्य से आता रहा।
1990 के बाद जब नयी आर्थिक नीतियां पूरे देश में लागू हुयीं तब सबसे पहले मजदूर वर्ग को इसने अपना निशाना बनाया और फिर धीरे-धीरे किसानों को अपने चंगुल में फंसा लिया। जिससे निकलने की नाकाम कोशिश किसान करता रहा। किसानों के लिए सरकार ने जो रियायतें दीं, वे भी किसानों की जिन्दगी को बदहाल होने से न बचा सकीं। इसका नतीजा यह हुआ कि एक तरफ देश में किसानों की आत्महत्या का एक दौर शुरू हुआ तो दूसरी तरफ किसानों का अंतहीन आन्दोलन शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।
किसानों ने अपने हक के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी। दो दशक में सबसे ज्यादा यदि किसी ने संघर्ष किया है तो वो किसान ही थे। लेकिन उनके पक्ष में सिवाय आश्वासन के कुछ भी नहीं आया। आखिर क्यों? क्या किसान आन्दोलन में कमी थी या राजनीतिक पार्टियों में कमी थी या किसान आन्दोलन भटकाव का शिकार था? किसान आन्दोलन चलाने वाली जितनी भी धाराएं देश के अंदर मौजूद हैं। उनका प्रतिनिधि इस उपन्यास में आया है। चाहे वह संसदीय तरीके से किसानों की समस्या हल करना चाहता हो या गैर संसदीय

Opiniones del libro

Preguntas frecuentes sobre el libro

Todos los libros de nuestro catálogo son Originales.
El libro está escrito en Hindi.
La encuadernación de esta edición es Tapa Blanda.

Preguntas y respuestas sobre el libro

¿Tienes una pregunta sobre el libro? Inicia sesión para poder agregar tu propia pregunta.

Opiniones sobre Buscalibre

Ver más opiniones de clientes